

नामजप तारक मंत्र राम है, जिसका सुफल अपार ।
इस मंत्र के जाप से, निश्चय बने निस्तार ।।
भक्तों से निवेदन
* कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में, किसी भी रंग की स्याही से कहीं भी, कभी भी राम नाम लेखन कार्य कर सकता है। इसमें जाति व उम्र का बंधन नहीं है। राम-राम लाल स्याही से लिखें तो अति उत्तम है, क्योंकि प्रेम का रंग लाल होता है। इस प्रकार लिखने से बिगड़े काम सँवर जाते है। ऐसा विश्वास है।
* इस पुस्तिका में राम नाम ही लिखे, क्योंकि राम नाम अपने आप में परिपूर्ण है। इसमें श्री या जी या हरे अथवा जय सीता शब्द नहीं है। राम-राम लिखने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है। ""राम"" नाम लेखन प्रमाणक भी है, जैसे सेतु निर्माण में प्रत्येक शिलाखण्ड पर राम नाम ही लिखा गया था।
* राम नाम लिखने का काम दिन या रात कभी भी कर सकते है। इस पुस्तिका को भगवत् स्वरूप समझकर रामनाम लेखन के अतिरिक्त अन्य काम में न लें। पुस्तिका पूर्ण हो जाने के पश्चात् सुरक्षित स्थान (पूजा स्थल) पर, अपना नाम-पता लिखकर मन्दिर में रखे अथवा बहती धारा में प्रवाहित करें।
* एक पुस्तिका का उपयोग एक ही व्यक्ति करें जिससे जप संख्या गणना में सहजता रहें।
* श्री राम नाम लेखन पुस्तिका आप अपने लिये, परिजनों, भक्तों अथवा धर्म प्रचार के लिये वितरण हेतु मँगवा सकते हैं या किसी धार्मिक संस्था, मंदिर व श्रीराम नाम लेखन बैंक को भी भेंट कर सकते हैं।
* राम नाम लेखन से जो आप राम नाम रूपी धन इकठ्ठा करोगे, इसका नामिनेशन (बंटवारा) नहीं होगा, न ही इस पर किसी प्रकार का कर देय होगा। यह राम रूपी धन आपका है, आपका ही रहेगा। राम रूपी धन से बढ़कर विश्व में कोई धन नहीं है।
कबिरा सब जग निर्धना, धनवंता न कोय ।
धनवंता सोइ जानिये, जाके राम नाम धन होय ।।
जपसंख्या
प्रत्येक पृष्ठ पर : 432 नामजप x कुल पृष्ठ : 260 = अंतिम संख्या : 1,12,320 नामजप