

मृत्यु क्यों होती है?
मृत्यु का भय क्यों दिया गया है?
क्या मृत्यु ही जीवन का एक मात्र सत्य है?
क्या मृत्यु उपरांत जीवन है?
इन प्रश्नों से संबंधित विषय को शब्दों में समझाना कठिन है। कारण मृत्यु के पश्चात् मनुष्य के जीवन का आयाम ही बदल जाता है। उदाहरणस्वरूप- किसी अंधे को आप प्रकाश के विषय में कैसे समझा सकते हैं? आप उसे दूसरी इंद्रियों का संदर्भ देकर ही समझाने का प्रयास करेंगे। आप उसे बताएँगे कि जैसे आवाज कान से टकराती है तो हमें सुनाई देता है, वैसे ही द़ृश्य आँखों से टकराते हैं तो हमें देखने का अनुभव होता है। यह बात सुनकर शायद अंधा जिसे सुनाई तो देता है, अपने ज्ञान से कुछ बातें समझ पाए। उसी तरह इस पुस्तक द्वारा ‘मृत्यु उपरांत जीवन’ की वह समझ देने का प्रयास किया जा रहा है, जो वास्तव में शब्दों से परे है।